Shwet Gyan
महत्वपूर्ण लेख
वेद-शास्त्र सम्मत तत्त्वज्ञान, सरल शब्दों में
अध्यात्म के बारे में
6 लेखअध्यात्म के बारे में
दरिद्र कौन है ? अगर आपके जीवन में सब कुछ है, धन है, हर प्रकार के भोग, सुख-सुविधा तथा साधन हैं, लेकिन अध्यात्म नहीं है, तो आप दरिद्र हैं। ये आप संसार के जितने भोग-विलास या सुख के साधन देख रहे हैं, सब एक क्षण के अंदर समाप्त हो…
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आध्यात्मिकता क्या है ?
प्रश्न- आध्यात्मिकता क्या है ? ऐसा कौन सा मार्ग है जिसपर चलकर जीवन आनंदमय हो सकता है ? उत्तर – आध्यात्मिकता का अर्थ है आत्मा सम्बन्धी विषय को प्राप्त करना। जो आत्मिक आनंद से सम्बंधित तत्त्व है, उसे प्राप्त करना। चूँकि हम
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ईश्वर क्या है ?
ईश्वर क्या है ? सम्पूर्ण संसार या सृष्टि या ब्रह्माण्ड के एक-एक जीव और जड़ से लेकर चेतन तक को नियंत्रित करने वाली शक्ति का नाम ईश्वर है। ईश्वर को हम तरह तरह के नामों से पुकारते हैं सत्य, ज्ञान, भगवान, प्रेम, आनंद इत्यादि
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ब्रह्म, माया और जीव क्या हैं ?
What is Brahm, Maya, Jeev ब्रह्म– वह अनंत शक्ति है, जिसके कारण सब कुछ चलायमान और दृश्य है, जो दृश्य नहीं है उसमें भी उसी की शक्ति व्याप्त है । यह ऐसे समझिए जैसे – science में Energy कही जाती है और वह सबमें विद्यमान
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विष्णु, राम, कृष्ण एवं राधा तत्त्व
पहले विष्णु तत्त्व, राम तत्त्व, कृष्ण तत्त्व और राधा तत्त्व क्या है, इसको समझना पड़ेगा । विष्णु तत्त्व :- विष्णु तत्त्व चित्त शक्ति है उसमें आनंद है लेकिन उसकी मधुरता कम है । राम तत्त्व- राम तत्त्व भी परम तत्त्व है, वह यो
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क्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश पूर्ण ईश्वर हैं ?
नहीं । ब्रह्मा, विष्णु, महेश पूर्ण ईश्वर में नहीं आते । ये केवल सृष्टि को चलाने के निमित्त हैं । ये पदवी होती है, जैसे – प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, फाइनेंस मिनिस्टर इत्यादि । उदाहरण स्वरुप, हमारे ब्रह्माण्ड के ब्रह्
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पर्यावरण एवं अध्यात्म
2 लेखपर्यावरण एवं अध्यात्म
आईये जानते हैं पर्यावरण के विषय में और समझते हैं कि किस प्रकार के पर्यावरण के विषय में हमारे शास्त्रों में निरूपण है । पर्यावरण : परि + आवरण अर्थात अपने आस-पास के वातावरण जहाँ हम निवास करते हैं या वह परिवेश जो जीवन को जीने में…
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अध्यात्म और वनस्पति
प्रायः पेड़-पौधों की प्रजाति को लोग वनस्पति समझ लेते हैं जो कि ग़लत है । वनस्पति का अर्थ होता है, वन का राजा या वन का पति । वनस्पति सभी पेड़-पौधों को नहीं कहा जाता है । वनस्पति विज्ञान के नाम से आधुनिक लेखकों ने सभी पेड़ पौध
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मंदिर का अर्थ
3 लेखमंदिर का अर्थ
वह सर्वत्र समान रूप से व्याप्त है। ऐसा नहीं है कि उनकी शक्तियाँ या वह कहीं कम, कहीं ज्यादा व्याप्त है। जो भगवान कुत्ते में व्याप्त हैं, वही भगवान समान रूप से हाथी में, चीटीं में, पापी में, पुण्यात्मा में, मन्दिर के देवालय में और…
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घर के मंदिर में प्रतिमा
प्रश्न:- क्या घर के मंदिर में भगवान की ज्यादा बड़ी प्रतिमा स्थापित नहीं करनी चाहिए ? उत्तर:- पहले के समय में घरों में मंदिरों का कोई विधान नहीं था। मन्दिर सदा एक ही स्थान पर बाहर रहते थे। आपने सुना होगा पुराणों इतिहासों
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दीपक जलाने का रहस्य एवं आरती का अर्थ
दीपक जलाने का रहस्य, आरती का अर्थ:- पुराने समय में, मूर्ति को अँधेरे में रखा जाता था, जिसे गर्भ गृह कहते थे। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद सूर्य निकलने से पहले लोग ध्यान के लिए मन्दिर जाते थे। रूप ध्यान करने के लिए मूर
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मन के बारे में
4 लेखमन के बारे में
इस संसार में और संसार के किसी भी तत्व में न सुख है न दुःख है । सुख दुख सब मन द्वारा निवेशित है प्रत्येक तत्व में । इसीलिए शंकराचार्य जी ने कहा सत्यं ब्रह्म जगत मिथ्या । मिथ्या का अर्थ लोग कुछ और ही कर देते हैं और फिर सिद्धान्त से…
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सुख-सुविधा होने पर भी दुःख क्यों ?
प्रश्न- सब सुख सुविधा होने पर भी हम दुखी क्यों हैं ? उत्तर- ज्यों ज्यों हम प्रकृति से दूर होते गये, त्यों त्यों अशांति, तरह तरह की व्याधियों के चपेट में आते गये l मन के साथ साथ तन भी अशांत होता चला गया l ज्यों ज्यों आधुन
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जब मन बहुत विचलित हो
सिर दर्द हो, थकान हो, शरीर से लेकर मन में शिथिलता हो, मन बहुत ही व्यग्र हो, आपको शांति चाहिए हो, तब एक काम कीजियेगा । अपने आस-पास कोई पुराना वृक्ष ढूँढिये । पीपल, आम, बरगद, नीम या कोई भी । पीपल या बरगद हो तो और भी अच्छा
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सुख दु:ख का आभास
मन को यह आभास एकमात्र अज्ञान के कारण होता है । गलत ज्ञान होना ,यही समस्त दुखों का कारण है । कुमति कीन्हि सब विश्व दुःखारी । एकमात्र गलत मति के कारण , अज्ञान के कारण यह सम्पूर्ण चराचर दुःखी है । हमने या हमारे मन ने जिस मे
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माला फेरत जुग भया
2 लेखमाला फेरत जुग भया
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर । कर का मनका डारि दे, मन का मनका फेर ।। मानसिक सुमिरन स्मरण, उनकी लीलाओं का ध्यान, उनके रूप का ध्यान, अंतःकरण में लगातार उनकी स्मृति बने रहने से श्रेष्ठ न कोई साधन था, न है और न ही बनेगा ।…
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नामजप सम्बंधित
क्या मानसिक जप सबसे श्रेष्ठ है? मानसिक जाप स्मरण उनकी लीलाओं का ध्यान, उनके रूप का ध्यान, अंतःकरण में लगातार उनकी स्मृति बने रहने से श्रेष्ठ न कोई साधन था, न है और न ही बनेगा । भगवान के यहाँ इंद्रियों की साधना या Marching का कोई…
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