शरद पूर्णिमा महोत्सव · 24–28 अक्टूबर 2026 · गुरुधाम, वृंदावन पंजीकरण

Words of devotees

भक्तों के अनुभव

साधकों के अनुभव, उन्हीं के शब्दों में

बहुत कुछ जानने को और समझने को मिला हमें घर बैठे, बहुत सारी गलत धारणाएं टूटी, अंधविश्वास दूर हुए, सनातन धर्म के सभी तीज-त्योहारों, मान्यताओं, भगवान की लीला, नाम, रूप, गुण, धाम, संत-महापुरुषों के बारे में, उनके पद भजन, हरि-गुरु सभी के बारे में इतना कुछ मिला कि जिसकी मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था।

आशुतोष सिंह अध्यापक – आगरा, उत्तर प्रदेश पूरा अनुभव

ईश्वर की तस्वीरें पहले निर्जीव सी लगती थीं परंतु अब सजीव लगने लगी है; ऐसा लगता है कि वह मुझे देख कर मुस्कुरा रहे हैं । ईश्वर का आभास अपने आस-पास होने लगा है, ‘भाव’ का अर्थ समझ आने लगा है। जिन भजनों में शिविर के पहले दिन आनंद नहीं आ रहा था, अब लगातार उन्हीं भजनों को सुन रहा हूँ

चंद्रशेखर पाठक बैंकर – जयपुर, राजस्थान पूरा अनुभव

भक्ति-भाव, पूजा, बचपन से ही परम्परागत रूप से व्यवहार में थी परंतु विश्वास में कमी थी। श्री गुरुदेव श्वेताभ पाठक जी के सान्निध्य में आने के बाद वह पूरी हो गई। इनके लेख सीधा दिल को चीरते हुए निकलते थे। ऐसा लगता था यही तो मैं सोचता हूँ, ऐसा ही तो मैं हूँ।

चेतना शर्मा दिल्ली पूरा अनुभव

Words of Devotees भगवान को जानने की इच्छा प्रारंभ से ही थी मगर जो भी मिलता अपने मन के अनुसार भगवान की परिभाषा बता कर चला जाता । समझ आया कि वास्तविक भक्ति क्या है, भक्ति तो इंद्रियों अर्थात आँख, नाक, कान, त्वचा, रसना का विषय है ही नहीं। भक्ति तो सिर्फ और सिर्फ मन का विषय है।

गिरीश कुमार जयपुर, राजस्थान पूरा अनुभव

भगवान तो केवल प्रेम का विषय हैं, वह सिर्फ प्रेम ही देते हैं कभी दंड नहीं देते। गुरुजी के इस सिद्धांत से मुझे अपने भगवान से अथाह प्रेम होने लगा और डर लगना बन्द हो गया, पूजा-पाठ से जुड़े अनेक भ्रम भी दूर हो गए। यह भी समझ आ गया कि भगवान सिर्फ भाव से ही मिल जाते हैं, उनको हमारे रुपये-पैसे की आवश्यकता नहीं है।

हर्षद वशिष्ठ CA - पलवल, हरियाणा पूरा अनुभव

अध्यात्म दर्शन’ समूह में मेरे सभी प्रश्नों के जवाब भईया जी के द्वारा मिले और दिमाग पर जमी हुई धूल भी झड़ गई। वृंदावन शिविर में मैंने जाना कि भगवान डरने के लिए नहीं बल्कि प्रेम करने लिए हैं, उनसे प्रेम करना है मन से। जहाँ-जहाँ मन जाए वहाँ-वहाँ श्रीकृष्ण को खड़ा कर दीजिए, सब कुछ आसान हो जाएगा और हुआ भी है।

मयूरी शर्मा आसनसोल, पश्चिम बंगाल पूरा अनुभव

अब तक जिस कर्मकाण्ड में फंसे हुए थे, उनसे धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे। जीवन को जीने का तरीका समझ में आने लगा। अब तक सिर्फ माला फेरना और मंदिर जाने को ही भक्ति समझ रहे थे लेकिन भैयाजी से मिलकर भक्ति का असली मतलब जाना। भैया जी ने भक्ति को बिल्कुल सहज बना दिया, बिना किसी डर के भक्ति करना सिखा दिया।

सोनम कटियार अध्यापक – कानपुर, उत्तर प्रदेश पूरा अनुभव

घर का वातावरण आध्यात्मिक रहा है लेकिन अध्यात्म का सही अर्थ परम आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी के सान्निध्य में आकर ज्ञात हुआ। इन साधना शिविरों के द्वारा हम क्रियात्मक साधना कर सकते हैं, शिविर के माध्यम से हम अपनी साधना को बढ़ा सकते हैं। सभी को शिविर में जरूर पहुँचना चाहिए क्योंकि हम जैसे सांसारिक व्यक्तियों के लिए साधना को बढ़ाने का यही एकमात्र उपाय है।

वर्षा भदौरिया सिरोही, राजस्थान पूरा अनुभव

अब उनके नाम, रूप, गुण, लीला में जो रस मिलने लगा है, उसका वर्णन शब्दों में तो नहीं किया जा सकता, उसको सिर्फ अनुभव किया जा सकता है। कोई सही-सही तत्वज्ञान और प्रभु प्रेम का रस चखना चाहता है तो विश्वास कीजिए आप बिल्कुल सही जगह हैं।

योगेश कुमार गर्ग भरतपुर, राजस्थान पूरा अनुभव

सेवा में सहभागी बनिए

सभी शिविर एवं प्रवचन निःशुल्क हैं। आपका सहयोग इस सेवा को आगे बढ़ाता है।