Vedic wisdom · Radha Krishna bhakti
भज गोविंदं
भज गोविंदं
गोविंदं भज मूढ़मते।
पूज्य प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज के सानिध्य में — वेद-शास्त्र सम्मत तत्त्वज्ञान, श्रीराधाकृष्ण भक्ति एवं क्रियात्मक साधना।
A non-profit spiritual trust sharing authentic Vedic siddhant, Bhagavad Gita teachings and guided sadhana.
॥ श्री राधा ॥
भज गोविंदं भज गोविंदंगोविंदं भज मूढ़मते।
पूज्य प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज के सानिध्य में
तत्त्वज्ञान · श्रीराधाकृष्ण भक्ति · क्रियात्मक साधना

प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
Gurudham · Vrindavan
पंजीकरण खुला है
आगामी साधना शिविर
पूज्य प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज के सानिध्य में
20–26
अगस्त 2026
राम तत्व दर्शन
04–05
सितंबर 2026
जन्माष्टमी महोत्सव
18–20
सितंबर 2026
राधाष्टमी महोत्सव
24–28
अक्टूबर 2026
पंजीकरण खुला
शरद पूर्णिमा महोत्सव
02–06
दिसंबर 2026
भक्ति रसोत्सव
01–05
जनवरी 2027
नववर्ष भक्ति महोत्सव
सभी शिविर निःशुल्क हैं · अधिक जानकारी हेतु आयोजक से संपर्क करें
Who are we
हम कौन हैं?
श्वेत प्रेम रस (SPR) एक लाभ निरपेक्ष, धर्मार्थ, शैक्षिक एवं आध्यात्मिक संस्था है। यह संस्था विश्व के समस्त भगवदीय दर्शनों के समन्वयक सिद्धांतों से जन-जन में व्याप्त गलत सिद्धांतों को बाहर निकालने एवं मोह से ग्रसित जीवों की दुःख निवृत्ति कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
Shwet Gyan
महत्वपूर्ण लेख
वेद-शास्त्र सम्मत तत्त्वज्ञान, सरल शब्दों में
अध्यात्म के बारे में
दरिद्र कौन है ? अगर आपके जीवन में सब कुछ है, धन है, हर प्रकार के भोग, सुख-सुविधा तथा साधन हैं, लेकिन अध्यात्म नहीं है, तो आप दरिद्र हैं। ये आप संसार के जितने भोग-विलास या सुख के साधन देख रहे हैं, सब एक क्षण के अंदर समाप्त हो…
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आध्यात्मिकता क्या है ?
प्रश्न- आध्यात्मिकता क्या है ? ऐसा कौन सा मार्ग है जिसपर चलकर जीवन आनंदमय हो सकता है ? उत्तर – आध्यात्मिकता का अर्थ है आत्मा सम्बन्धी विषय को प्राप्त करना। जो आत्मिक आनंद से सम्बंधित तत्त्व है, उसे प्राप्त करना। चूँकि हम
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ईश्वर क्या है ?
ईश्वर क्या है ? सम्पूर्ण संसार या सृष्टि या ब्रह्माण्ड के एक-एक जीव और जड़ से लेकर चेतन तक को नियंत्रित करने वाली शक्ति का नाम ईश्वर है। ईश्वर को हम तरह तरह के नामों से पुकारते हैं सत्य, ज्ञान, भगवान, प्रेम, आनंद इत्यादि
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ब्रह्म, माया और जीव क्या हैं ?
What is Brahm, Maya, Jeev ब्रह्म– वह अनंत शक्ति है, जिसके कारण सब कुछ चलायमान और दृश्य है, जो दृश्य नहीं है उसमें भी उसी की शक्ति व्याप्त है । यह ऐसे समझिए जैसे – science में Energy कही जाती है और वह सबमें विद्यमान
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विष्णु, राम, कृष्ण एवं राधा तत्त्व
पहले विष्णु तत्त्व, राम तत्त्व, कृष्ण तत्त्व और राधा तत्त्व क्या है, इसको समझना पड़ेगा । विष्णु तत्त्व :- विष्णु तत्त्व चित्त शक्ति है उसमें आनंद है लेकिन उसकी मधुरता कम है । राम तत्त्व- राम तत्त्व भी परम तत्त्व है, वह यो
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क्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश पूर्ण ईश्वर हैं ?
नहीं । ब्रह्मा, विष्णु, महेश पूर्ण ईश्वर में नहीं आते । ये केवल सृष्टि को चलाने के निमित्त हैं । ये पदवी होती है, जैसे – प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, फाइनेंस मिनिस्टर इत्यादि । उदाहरण स्वरुप, हमारे ब्रह्माण्ड के ब्रह्
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Shwet Ras
पद रचनाएं
श्रीराधाकृष्ण प्रेम में रचित पद
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सत्संग एवं प्रवचन
महोत्सव के लाइव सत्र और नवीनतम प्रवचन
🔴 LIVE Day 7 | S 1 | श्वेत प्रेम रस महोत्सव | गुरु धाम वृन्दावन | प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
श्वेत प्रेम रस महोत्सव के समस्त सत्र इस प्लेलिस्ट में क्रमशः उपलब्ध हैं। आगामी सत्संग का सीधा प्रसारण चैनल पर होता है।
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Shwet Publication
श्वेत तत्त्व दर्शन – भाग 1
वेद शास्त्रों के समस्त सिद्धांतों का सरल विधि से निरूपण। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य को इतनी सहज विधि से समझाया गया है जो जनमानस के लिए ग्राह्य है।
Words of devotees
भक्तों के अनुभव
साधकों के अपने शब्दों में
बहुत कुछ जानने को और समझने को मिला हमें घर बैठे, बहुत सारी गलत धारणाएं टूटी, अंधविश्वास दूर हुए, सनातन धर्म के सभी तीज-त्योहारों, मान्यताओं, भगवान की लीला, नाम, रूप, गुण, धाम, संत-महापुरुषों के बारे में, उनके पद भजन, हरि-गुरु सभी के बारे में इतना कुछ मिला कि जिसकी मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था।
आशुतोष सिंह अध्यापक – आगरा, उत्तर प्रदेश पूरा अनुभवईश्वर की तस्वीरें पहले निर्जीव सी लगती थीं परंतु अब सजीव लगने लगी है; ऐसा लगता है कि वह मुझे देख कर मुस्कुरा रहे हैं । ईश्वर का आभास अपने आस-पास होने लगा है, ‘भाव’ का अर्थ समझ आने लगा है। जिन भजनों में शिविर के पहले दिन आनंद नहीं आ रहा था, अब लगातार उन्हीं भजनों को सुन रहा हूँ
चंद्रशेखर पाठक बैंकर – जयपुर, राजस्थान पूरा अनुभवभक्ति-भाव, पूजा, बचपन से ही परम्परागत रूप से व्यवहार में थी परंतु विश्वास में कमी थी। श्री गुरुदेव श्वेताभ पाठक जी के सान्निध्य में आने के बाद वह पूरी हो गई। इनके लेख सीधा दिल को चीरते हुए निकलते थे। ऐसा लगता था यही तो मैं सोचता हूँ, ऐसा ही तो मैं हूँ।
चेतना शर्मा दिल्ली पूरा अनुभवWords of Devotees भगवान को जानने की इच्छा प्रारंभ से ही थी मगर जो भी मिलता अपने मन के अनुसार भगवान की परिभाषा बता कर चला जाता । समझ आया कि वास्तविक भक्ति क्या है, भक्ति तो इंद्रियों अर्थात आँख, नाक, कान, त्वचा, रसना का विषय है ही नहीं। भक्ति तो सिर्फ और सिर्फ मन का विषय है।
गिरीश कुमार जयपुर, राजस्थान पूरा अनुभवभगवान तो केवल प्रेम का विषय हैं, वह सिर्फ प्रेम ही देते हैं कभी दंड नहीं देते। गुरुजी के इस सिद्धांत से मुझे अपने भगवान से अथाह प्रेम होने लगा और डर लगना बन्द हो गया, पूजा-पाठ से जुड़े अनेक भ्रम भी दूर हो गए। यह भी समझ आ गया कि भगवान सिर्फ भाव से ही मिल जाते हैं, उनको हमारे रुपये-पैसे की आवश्यकता नहीं है।
हर्षद वशिष्ठ CA - पलवल, हरियाणा पूरा अनुभवअध्यात्म दर्शन’ समूह में मेरे सभी प्रश्नों के जवाब भईया जी के द्वारा मिले और दिमाग पर जमी हुई धूल भी झड़ गई। वृंदावन शिविर में मैंने जाना कि भगवान डरने के लिए नहीं बल्कि प्रेम करने लिए हैं, उनसे प्रेम करना है मन से। जहाँ-जहाँ मन जाए वहाँ-वहाँ श्रीकृष्ण को खड़ा कर दीजिए, सब कुछ आसान हो जाएगा और हुआ भी है।
मयूरी शर्मा आसनसोल, पश्चिम बंगाल पूरा अनुभवअब तक जिस कर्मकाण्ड में फंसे हुए थे, उनसे धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे। जीवन को जीने का तरीका समझ में आने लगा। अब तक सिर्फ माला फेरना और मंदिर जाने को ही भक्ति समझ रहे थे लेकिन भैयाजी से मिलकर भक्ति का असली मतलब जाना। भैया जी ने भक्ति को बिल्कुल सहज बना दिया, बिना किसी डर के भक्ति करना सिखा दिया।
सोनम कटियार अध्यापक – कानपुर, उत्तर प्रदेश पूरा अनुभवघर का वातावरण आध्यात्मिक रहा है लेकिन अध्यात्म का सही अर्थ परम आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी के सान्निध्य में आकर ज्ञात हुआ। इन साधना शिविरों के द्वारा हम क्रियात्मक साधना कर सकते हैं, शिविर के माध्यम से हम अपनी साधना को बढ़ा सकते हैं। सभी को शिविर में जरूर पहुँचना चाहिए क्योंकि हम जैसे सांसारिक व्यक्तियों के लिए साधना को बढ़ाने का यही एकमात्र उपाय है।
वर्षा भदौरिया सिरोही, राजस्थान पूरा अनुभवअब उनके नाम, रूप, गुण, लीला में जो रस मिलने लगा है, उसका वर्णन शब्दों में तो नहीं किया जा सकता, उसको सिर्फ अनुभव किया जा सकता है। कोई सही-सही तत्वज्ञान और प्रभु प्रेम का रस चखना चाहता है तो विश्वास कीजिए आप बिल्कुल सही जगह हैं।
योगेश कुमार गर्ग भरतपुर, राजस्थान पूरा अनुभव