शरद पूर्णिमा महोत्सव · 24–28 अक्टूबर 2026 · गुरुधाम, वृंदावन पंजीकरण
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज

Vedic wisdom · Radha Krishna bhakti

भज गोविंदं
भज गोविंदं

गोविंदं भज मूढ़मते

पूज्य प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज के सानिध्य में — वेद-शास्त्र सम्मत तत्त्वज्ञान, श्रीराधाकृष्ण भक्ति एवं क्रियात्मक साधना।

A non-profit spiritual trust sharing authentic Vedic siddhant, Bhagavad Gita teachings and guided sadhana.

प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज Gurudham · Vrindavan

॥ श्री राधा ॥

भज गोविंदं भज गोविंदंगोविंदं भज मूढ़मते

पूज्य प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज के सानिध्य में
तत्त्वज्ञान · श्रीराधाकृष्ण भक्ति · क्रियात्मक साधना

प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज

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श्वेत प्रेम रस सत्संग

Who are we

हम कौन हैं?

श्वेत प्रेम रस (SPR) एक लाभ निरपेक्ष, धर्मार्थ, शैक्षिक एवं आध्यात्मिक संस्था है। यह संस्था विश्व के समस्त भगवदीय दर्शनों के समन्वयक सिद्धांतों से जन-जन में व्याप्त गलत सिद्धांतों को बाहर निकालने एवं मोह से ग्रसित जीवों की दुःख निवृत्ति कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

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Shwet Gyan

महत्वपूर्ण लेख

वेद-शास्त्र सम्मत तत्त्वज्ञान, सरल शब्दों में

अध्यात्म के बारे में

दरिद्र कौन है ? अगर आपके जीवन में सब कुछ है, धन है, हर प्रकार के भोग, सुख-सुविधा तथा साधन हैं, लेकिन अध्यात्म नहीं है, तो आप दरिद्र हैं। ये आप संसार के जितने भोग-विलास या सुख के साधन देख रहे हैं, सब एक क्षण के अंदर समाप्त हो…

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आध्यात्मिकता क्या है ?

प्रश्न- आध्यात्मिकता क्या है ? ऐसा कौन सा मार्ग है जिसपर चलकर जीवन आनंदमय हो सकता है ? उत्तर – आध्यात्मिकता का अर्थ है आत्मा सम्बन्धी विषय को प्राप्त करना। जो आत्मिक आनंद से सम्बंधित तत्त्व है, उसे प्राप्त करना। चूँकि हम

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ईश्वर क्या है ?

ईश्वर क्या है ? सम्पूर्ण संसार या सृष्टि या ब्रह्माण्ड के एक-एक जीव और जड़ से लेकर चेतन तक को नियंत्रित करने वाली शक्ति का नाम ईश्वर है। ईश्वर को हम तरह तरह के नामों से पुकारते हैं सत्य, ज्ञान, भगवान, ‌प्रेम, आनंद इत्यादि

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ब्रह्म, माया और जीव क्या हैं ?

What is Brahm, Maya, Jeev ब्रह्म– वह अनंत शक्ति है, जिसके कारण सब कुछ चलायमान और दृश्य है, जो दृश्य नहीं है उसमें भी उसी की शक्ति व्याप्त है । यह ऐसे समझिए जैसे – science में Energy कही जाती है और वह सबमें विद्यमान

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विष्णु, राम, कृष्ण एवं राधा तत्त्व

पहले विष्णु तत्त्व, राम तत्त्व, कृष्ण तत्त्व और राधा तत्त्व क्या है, इसको समझना पड़ेगा । विष्णु तत्त्व :- विष्णु तत्त्व चित्त शक्ति है उसमें आनंद है लेकिन उसकी मधुरता कम है । राम तत्त्व- राम तत्त्व भी परम तत्त्व है, वह यो

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क्या ब्रह्मा, विष्णु और महेश पूर्ण ईश्वर हैं ?

नहीं । ब्रह्मा, विष्णु, महेश पूर्ण ईश्वर में नहीं आते । ये केवल सृष्टि को चलाने के निमित्त हैं । ये पदवी होती है, जैसे – प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, फाइनेंस मिनिस्टर इत्यादि । उदाहरण स्वरुप, हमारे ब्रह्माण्ड के ब्रह्

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पद रचनाएं

श्रीराधाकृष्ण प्रेम में रचित पद

दीखै री सखि , चहुँदिशि मोहें नीलाभ ! शीश मुकुट कर मुरली सुशोभित , पहिने रे पीताभ ! नीलकमल सों अँखियाँ जिनकी , तिरछी भौंह कृष्णाभ ! मधुर मधुर मुसकनि नित जिनकी , दन्त सुघर श्वेताभ !
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
मन मूरख अब तो मान रे ! देह क्रिया ते कबहुँ न मिलिहैं , मन के श्री भगवान् रे ! चार धाम पद यात्रा कर चंह , लख कर गंग स्नान रे ! करहु करोरन योग यज्ञ अरु , धर्म को लै नुष्ठान रे !
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
अलि तू काहें सब कलि दास ? इत उत भटकत नित सुमनन पर , लै अंतरि मधु आस ! भटकत भ्रमत भ्रमर कलि कलि पर , कीन्हों विविध प्रयास ! करत अनादिकाल ते श्रम नित , नहिं पायो सुखरास !
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
कर्मभिरत नित खग प्रति पल पल ! उठि करि भोर किरण ते पहिले , भरत उदर कृमि, कीटक, फल, जल ! उड़ि उड़ि सुतल वितल भू तल तल , करत परिश्रम बनि नित चंचल ! तृण तृण जोरि जोरि चहुँदिशि ते , निर्मित करत नीड़ निज संबल !
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
मोहिं सद्गुरु लीन्हीं बचाय ! डूबत रह्यो अगाध उदधि मंह , ऊपर नीचे जल अधिकाय ! भांति भांति के विषम जीव सब , नोंचत इत उत मम तनु खाय ! अन्धकार चहुँ ओर दिखत रह , कोऊ दिशा नहिं कछु लखाय !
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
देखो री माई , मुखमंडल को हास । चन्द्रानन अस शरद चंद्रिका , करत रसिक रस रास । अधर मधुर मधु भरे कलश सों , वन जनु खिलत पलास । सुघर दशन मुक्ता पंक्तिहुँ जनु , निकसत श्वेत प्रभास ।
प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज
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श्वेत प्रेम रस महोत्सव के समस्त सत्र इस प्लेलिस्ट में क्रमशः उपलब्ध हैं। आगामी सत्संग का सीधा प्रसारण चैनल पर होता है।

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800 views भाग्य बदलने वाला छोटा सा उपाय #SanatanDharma #Daan 790 views अमरोहा के प्राकृतिक वातावरण में साधना के अविस्मरणीय पल | शांति, भक्ति और दिव्य अनुभव 555 views 🌸 Shwet Prem Ras Mahotsav 2026 Memories | Divine Moments | Prem Rasik Shri Shwetabh Ji Maharaj 501 views संसार में खूब चतुर बनो, लेकिन भगवान के सामने नहीं | Guruji Ki Anmol Vani 486 views तपस्वी कौन होता है? | श्रीराम, हनुमान जी और सच्ची भक्ति का रहस्य 425 views 99% लोग नहीं जानते – प्रसाद का वास्तविक अर्थ क्या है? | प्रसाद का असली रहस्य! 383 views राधे राधे गोविंद | Guruji Shwetabh Ji Maharaj Bhajan | Soulful Krishna Kirtan ✨ 370 views सत्य क्या है? गुरुजी ने बताया जीवन का सबसे बड़ा रहस्य | प्रेम रसिक श्री श्वेताभ जी महाराज 364 views Prabhu ke prem mein doobne ka rahasya #Bhakti #RadhaKrishna 359 views भगवान शंकर को कैसे प्रसन्न करें? | प्रेम रसिक श्वेताभ जी महाराज 338 views गुरु चरणों में ही जीवन की सफलता | Guru Charan Ka Mahatva | Spiritual Pravachan 296 views नृत्य से कैसे जुड़ें प्रभु से? #Bhakti #Kirtan #ShwetabhJiMaharaj
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श्वेत तत्त्व दर्शन – भाग 1

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श्वेत तत्त्व दर्शन – भाग 1

वेद शास्त्रों के समस्त सिद्धांतों का सरल विधि से निरूपण। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से भक्ति, ज्ञान एवं वैराग्य को इतनी सहज विधि से समझाया गया है जो जनमानस के लिए ग्राह्य है।

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Words of devotees

भक्तों के अनुभव

साधकों के अपने शब्दों में

बहुत कुछ जानने को और समझने को मिला हमें घर बैठे, बहुत सारी गलत धारणाएं टूटी, अंधविश्वास दूर हुए, सनातन धर्म के सभी तीज-त्योहारों, मान्यताओं, भगवान की लीला, नाम, रूप, गुण, धाम, संत-महापुरुषों के बारे में, उनके पद भजन, हरि-गुरु सभी के बारे में इतना कुछ मिला कि जिसकी मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकता था।

आशुतोष सिंह अध्यापक – आगरा, उत्तर प्रदेश पूरा अनुभव

ईश्वर की तस्वीरें पहले निर्जीव सी लगती थीं परंतु अब सजीव लगने लगी है; ऐसा लगता है कि वह मुझे देख कर मुस्कुरा रहे हैं । ईश्वर का आभास अपने आस-पास होने लगा है, ‘भाव’ का अर्थ समझ आने लगा है। जिन भजनों में शिविर के पहले दिन आनंद नहीं आ रहा था, अब लगातार उन्हीं भजनों को सुन रहा हूँ

चंद्रशेखर पाठक बैंकर – जयपुर, राजस्थान पूरा अनुभव

भक्ति-भाव, पूजा, बचपन से ही परम्परागत रूप से व्यवहार में थी परंतु विश्वास में कमी थी। श्री गुरुदेव श्वेताभ पाठक जी के सान्निध्य में आने के बाद वह पूरी हो गई। इनके लेख सीधा दिल को चीरते हुए निकलते थे। ऐसा लगता था यही तो मैं सोचता हूँ, ऐसा ही तो मैं हूँ।

चेतना शर्मा दिल्ली पूरा अनुभव

Words of Devotees भगवान को जानने की इच्छा प्रारंभ से ही थी मगर जो भी मिलता अपने मन के अनुसार भगवान की परिभाषा बता कर चला जाता । समझ आया कि वास्तविक भक्ति क्या है, भक्ति तो इंद्रियों अर्थात आँख, नाक, कान, त्वचा, रसना का विषय है ही नहीं। भक्ति तो सिर्फ और सिर्फ मन का विषय है।

गिरीश कुमार जयपुर, राजस्थान पूरा अनुभव

भगवान तो केवल प्रेम का विषय हैं, वह सिर्फ प्रेम ही देते हैं कभी दंड नहीं देते। गुरुजी के इस सिद्धांत से मुझे अपने भगवान से अथाह प्रेम होने लगा और डर लगना बन्द हो गया, पूजा-पाठ से जुड़े अनेक भ्रम भी दूर हो गए। यह भी समझ आ गया कि भगवान सिर्फ भाव से ही मिल जाते हैं, उनको हमारे रुपये-पैसे की आवश्यकता नहीं है।

हर्षद वशिष्ठ CA - पलवल, हरियाणा पूरा अनुभव

अध्यात्म दर्शन’ समूह में मेरे सभी प्रश्नों के जवाब भईया जी के द्वारा मिले और दिमाग पर जमी हुई धूल भी झड़ गई। वृंदावन शिविर में मैंने जाना कि भगवान डरने के लिए नहीं बल्कि प्रेम करने लिए हैं, उनसे प्रेम करना है मन से। जहाँ-जहाँ मन जाए वहाँ-वहाँ श्रीकृष्ण को खड़ा कर दीजिए, सब कुछ आसान हो जाएगा और हुआ भी है।

मयूरी शर्मा आसनसोल, पश्चिम बंगाल पूरा अनुभव

अब तक जिस कर्मकाण्ड में फंसे हुए थे, उनसे धीरे-धीरे बाहर निकलने लगे। जीवन को जीने का तरीका समझ में आने लगा। अब तक सिर्फ माला फेरना और मंदिर जाने को ही भक्ति समझ रहे थे लेकिन भैयाजी से मिलकर भक्ति का असली मतलब जाना। भैया जी ने भक्ति को बिल्कुल सहज बना दिया, बिना किसी डर के भक्ति करना सिखा दिया।

सोनम कटियार अध्यापक – कानपुर, उत्तर प्रदेश पूरा अनुभव

घर का वातावरण आध्यात्मिक रहा है लेकिन अध्यात्म का सही अर्थ परम आदरणीय श्री श्वेताभ पाठक भैया जी के सान्निध्य में आकर ज्ञात हुआ। इन साधना शिविरों के द्वारा हम क्रियात्मक साधना कर सकते हैं, शिविर के माध्यम से हम अपनी साधना को बढ़ा सकते हैं। सभी को शिविर में जरूर पहुँचना चाहिए क्योंकि हम जैसे सांसारिक व्यक्तियों के लिए साधना को बढ़ाने का यही एकमात्र उपाय है।

वर्षा भदौरिया सिरोही, राजस्थान पूरा अनुभव

अब उनके नाम, रूप, गुण, लीला में जो रस मिलने लगा है, उसका वर्णन शब्दों में तो नहीं किया जा सकता, उसको सिर्फ अनुभव किया जा सकता है। कोई सही-सही तत्वज्ञान और प्रभु प्रेम का रस चखना चाहता है तो विश्वास कीजिए आप बिल्कुल सही जगह हैं।

योगेश कुमार गर्ग भरतपुर, राजस्थान पूरा अनुभव
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